Leading People's Science Movement

Santosh obtained his Engineering Degree in Electronics and Communication from Maulana Azad College of Technology, Bhopal, a Regional Engineering College, with distinction and went on to work in Jyoti Limited Baroda and Bharat Electronics Limited, Ghaziabad. During this period he was also Selected for Indian Engineering Services (1976) and Indian Civil Services (1981).

In the wake of widespread disillutionment among intellectuals after emergency, Delhi Science forum was formed to look for alternative path for development. Santosh was a founder member of DSF with Shri P.N. Haksar as its Chairman. There he worked on science policy issues. On arrival at Bhopal, he formed Madhya Pradesh Vigyan Sabha with like minded people with the vision of popularizing Science, appropriate technology usage for artisans and innovation in education. MPVS did pioneering work in documenting and in relief and rehabilitation of Bhopal Gas Tragedy Victims.

Santosh is also the founder Secretary of M.P. Bharat Gyan Vigyan Samiti which led the Literacy movement in the state. To create training and material development facilities in the field of literacy and education, he then founded Abhivyakti State Resource Centre with Writers, Intellectuals and Science activists leading the People's Science Movement.

Santosh has been the member of the National Executive Committees of All India People's Science Network and Bharat Gyan Vigyan Samiti and State Convenor of BJVJ '87, BGVJ '90 and BJ GVJ '92 as aslo the All People's Science Congress in 96. He then became Director of SRC and later was the Chairman of this institution to provide his mentorship.

Addressing the first conference of Madhya Pradesh Vigyan Sabha, Dr. Mishra, DG, MAPCOST & Rajendra Kothari, Social Activist are also present

In the first MPVS conference

A session of MPVS conference, also present are P.K. Dey, Ramprakash and A.P. Nandi

Taking oath for using Science in favour of people

With artists in a Gyan Vigyan Jatha

Presenting Science and Literacy Songs in AIPSC

जन विज्ञान आंदोलन क्या है ?

बीसवीे शताब्दी के दूसरे भाग में एक नये किस्म का सामूहिक संघर्ष देखने में आया है। इनमे से कुछ समूह तो पर्यावरण चेतना के प्रचार पर आधारित है, और कुछ विज्ञान एवं तकनीक के मूलभूत स्वरूप और उसके उपयोग की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर काम कर रहे है। पिछले दो दशकों में लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों में पर्यावरण आधारित संगठनों - विशेषकर उन्होने, जो न्यूक्लियर अस्त्रों के विरोध में है ने बहुत ताकतवर रूप ग्रहण कर लिया है। पश्चिम जर्मनी में इस तरह के एक संगठन ने आपको एक राजनैतिक पार्टी के रूप मे संगठित कर लिया। ग्रीन पार्टी के नाम से जानी जाने वाली पार्टी को पिछले चुनावों में अच्छा जनाधार प्राप्त हुआ।

सुदूर पूर्व में सहावत आलम मलेशिया एक काफी जागरूक पर्यावरणीय ग्रुप है। भारत में भी कई पर्यावरणीय संगठन काम करते रहे है पर इन सबमें एक भारी कमी पाई जाती है। वह है उनका समाज की अन्य समस्याओं से करीब-करीब पूरा अलगाव और सामाजिक अर्थिक ढाँचे की पर्यावरण से अंतः सम्बध्दता स्थापित करते है। अमरीका का साइंस फॉर द पीपुल संगठन और ब्रिटेन का रेडिकल साईस संगठन इसी श्रेणी में आते है।

भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही कुछ संगठन प्रकाश में आये थे। "बंगीय विज्ञान परिषद" जिसे सत्येन्द्रनाथ बोस ने स्थापित किया था, "विज्ञान प्रचार समिति" जो उड़ीसा में कार्यरत हुई और "आसाम साइंस सोसायटी" इसी श्रेणी में आते है। लेकिन इन सबसे पहली बार केरल शास्त्र साहित्य परिषद प्रयुक्त किये गये थे जिसने इस वर्ष ही अपने पच्चीस साल पूरे किये है। कर्नाटक में कर्नाटक राज्य विज्ञान परिषद्, तमिलनाडु में तमिलनाडु साइंस फोरम, पांडिचेरी में पांडिचेरी साइंस फोरम, महाराष्ट्र में लोक विज्ञान संगठन दिल्ली में दिल्ली साइंस फोरम और मध्यप्रदेश में मध्यप्रदेश विज्ञान सभा इसी श्रेणी में आते है। जन विज्ञान आन्दोलन का उद्देश्य विज्ञान के पूरे वर्णक्रम को समेटना है चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सिंचाई सुविधायें हों, जमीन का उपयोग हो, वन हों या पर्यावरण, ग्रामीण तकनीक हो या तकनीक का आयात, जन विज्ञान आन्दोलन इन सभी विषयों पर दृष्टिपात करता है।

समय आ गया है कि एक नया स्वतंत्रता संग्राम शुरू कर दिया जाये। पर निर्भरता से स्वतंत्रता, अज्ञानता से स्वतंत्रता, घृणा और अविश्वास से स्वतंत्रता। यह संग्राम आत्मनिर्भर होने के लिए होगा, साक्षर होने के लिए होगा, एक होने के लिए होगा।

भारत जन विज्ञान जत्था के घोषणा पत्र से

Website counter